
कभी-कभी इसका अंदाज़ा नहीं होता कि आने वाला वक्त कैसा होगा. ऐसे ही आने वाले वक्त से बेख़बर जब एक सुबह टीवी पर निगाह गई, तो हर जगह ख़बरें चल रही थी युवराज को कैंसर है.
कुछ महीनों पहले इस ख़बर ने सभी क्रिकेट प्रेमियों को परेशान किया था कि युवराज को ट्यूमर है, लेकिन साथ ही ये भी सूचना दी गई थी कि कैंसर नहीं है.
और अब सभी क्रिकेट प्रेमियों को सकते में डालने वाली ये ख़बर कि युवराज सिंह को कैंसर है. सहसा यक़ीन नहीं हुआ. होता भी कैसे जिस व्यक्ति ने क्रिकेट के माध्यम से क्रिकेट प्रेमियों को कई जश्न वाले दिन दिए हो, एक सेलिब्रिटी हो और ज़िंदादिली की निशानी हो, उसे इस हाल में देखना किसे पसंद होगा.
आशा, निराशा और हताशा के बीच जब आख़िरकार 28 साल बाद भारत ने पिछले साल क्रिकेट का विश्व कप जीता था, तो सभी क्रिकेट प्रेमियों की तरह हमने भी जम कर जश्न मनाया था.
सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह को गले लगकर फूट-फूट कर रोते देखकर शायद ही कोई भारतीय क्रिकेट प्रेमी भावुक नहीं हुआ होगा. अगर क्रिकेट भारत के नस-नस में बसा है, तो सच है वो क्षण रोने वाला ही था.
थोड़ा और पीछे चलते हैं जब वर्ष 2002 में नैटवेस्ट सिरीज़ के फ़ाइनल में युवराज सिंह ने मोहम्मद कैफ़ के साथ मिलकर भारत को शानदार जीत दिलाई थी. वो दिन भी झूमने के थे.
वो दिन भी याद कर लेते हैं जब 2007 में क्रिकेट विश्व कप में हार से भारत का हर क्रिकेट प्रेमी निराश था. इसी साल महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में कुछ अनुभवी तो कुछ युवा खिलाड़ियों की बदौलत भारत को ट्वेन्टी-20 विश्व कप में जीत दिला दी.
उसी प्रतियोगिता में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में जब युवी का बल्ला चला और ऐसा चला कि स्टुअर्ट ब्रॉ़ड के एक ओवर में छह आसमानी छक्के देखने को मिले. किसने उस बेहतरीन क्षण का लुत्फ़ न उठाया होगा.
लेकिन हम ही कई बार खिलाड़ियों और उनके खेल को लेकर इतने आलोचनात्मक हो जाते हैं कि हमें अंदाज़ा ही नहीं होता कि वे कितने दबाव में, कितनी विपरीत परिस्थितियों में खेलते हैं.
पिछले साल के विश्व कप को याद कीजिए और याद कीजिए युवराज की कई बेहतरीन पारियाँ. भारत जीता. किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि मैदान पर खाँसते, उल्टियाँ करते युवराज कितनी बड़ी बीमारी पाले हुए हैं.
युवराज और उनके परिवार को पता था कि युवराज की बीमारी गंभीर है, लेकिन युवराज ने खेलने का फ़ैसला किया. ख़िताब जीतने के बाद उनकी आँखों से लगातार निकलती अश्रुधारा सारी कहानी बयां कर रही थी.
लेकिन क्रिकेट प्रेमियों को इसका अंदाज़ा बहुत बाद में हुआ कि युवराज अपनी ज़िंदगी को दाँव पर लगाकर विश्व कप में खेल रहे थे.
वही युवराज आज अपने जीवन के अहम मोड़ पर हैं. डॉक्टर कह रहे हैं घबराने वाली बात नहीं, युवराज ठीक हो जाएँगे और फिर मैदान पर आ सकेंगे. युवराज ने भी ट्विटर पर संदेश लिखकर लोगों को भरोसा दिया है कि वे फ़ाइटर हैं और मज़बूत होकर वापस आएँगे.
एक विज्ञापन में युवराज को ये कहते सुना जाता है- जब तक बल्ला चल रहा है....ठाट हैं. जब बल्ला नहीं चलेगा फिर....?????? सफलता में तो सब साथ होते हैं, लेकिन जब चोट लगती है तो ख़ुद को मालूम होता है उसके बारे में.
आज हमें ये जताने की ज़रूरत है कि उनकी इस पीड़ा में हम उनके साथ है. युवराज के चलते क्रिकेट प्रेमियों ने खुशियों के क्षण जिए हैं. अब एक क्रिकेट प्रेमी होने के नाते हमें युवराज को ये बताने की ज़रूरत है कि हमारे लिए उनकी कितनी अहमियत है.





